Saturday, 19 December 2015

सैनिक

जब तुलसी पर नागफनी की, पहरेदारी भाती है
तब धरती भी गद्दारो के, रक्त की प्यासी हो जाती है।

जब कुरुक्षेत्र में अर्जुन भी , कायरता दिखलाता है
गदा युद्ध के नियम में , जब भीम भी चोटे खाता है।

जब समाज में वस्त्र हरण को, पुरुषोत्सव समझा जाता है
जब भी राजा, पुत्रमोह में, धृतराष्ट् बन जाता है।

कोई भीष्म और द्रोण भी , सत्ता से बन्ध जाते हो
कर्ण जैसे महावीर भी जब , जब सत्ता को समझ न पाते हो।

और विदुर का निति ज्ञान जब , अंतिम साँसे गिनता हो
तब पुनः भूत में जा गीता का,  पाठ पढ़ाना पड़ता है।

पाञ्चजन्य के शंखनाद से , अलख जगाना पड़ता है
देश धर्म की रक्षा के हेतू से,  शस्त्र उठाना पड़ता है।

कृष्ण खड़े हो दूर तो भी, अभिमन्यु बन जाना पड़ता है
चक्रव्यूह को भेदने को , पौरुष दिखलाना पड़ता है।

संकट की घड़ियों में बस,

सैनिक बन जाना पड़ता है।
सैनिक बन जाना पड़ता है
सैनिक बन जाना पड़ता है |

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